Monday, October 12, 2015

इस वर्ष 8 साल बाद चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग होने के कारण शास्त्रानुसार अभिजीत मुहूर्त में स्थापना करनी चाहिए। परंतु किसी कारणवश इस समय स्थापना नहीं कर सकें तो चर, लाभ, शुभ या राहुकाल छोड़कर स्थिर लग्न में भी स्थापना की जा सकतीहै। इस वर्ष शारदीय नवरात्र इस बार मंगलवार 13 अक्टूबर 2015 से शुरू हो रहे हैं, जो माता के भक्तों के लिए सुख-समृद्धि लेकर आएंगे। इस श्राद्ध पक्ष की तिथि क्षय होना एवं नवरात्र की तिथि में वृद्धि होना सुख-समृद्धि का संकेत है।
सूर्योदय के अनुसार मंगल मुहूर्त इस प्रकार हैं : –
चौघड़िया मुहूर्त : —
प्रात: 9.19-10.46 तक चर।
प्रात: 10.46-12.13 तक रात्रि 7.33 -9.06 तक लाभ।
दोपहर 12.13-1.40 तक रात्रि 12.13-1.46 तक अमृत।
रात्रि 10.40-12.13 तक शुभ।
अभिजीत मुहूर्त- 11.49-12.35 तक।
लग्न मुहूर्त :
प्रात : 6.22-6.45 तक कन्या (पत्रिका अनुसार शुभ)।
प्रात : 8.59-11.15 तक वृश्चिक।
दोपहर : 3.07-4.41 तक कुंभ*।
रात्रि : 7.52-9.50 तक वृषभ।
विशेष ध्यान रखें– दोपहर 3.06-4.33 तक राहुकाल रहेगामंगलवार को चित्रा नक्षत्र एवं वैदृती योग में शुरू हो रहे हैं। इसके कारण इस बार प्रात: में घट स्थापना का मुहूर्त नहीं हैं।
इस बार घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त प्रात: 11.51 से 12.37 बजे तक रहेगा। चित्रा नक्षत्र शाम 4.38 बजे तक एवं वैदृती योग रात्रि 11.17 बजे तक रहेगा। इस बार दो प्रतिपदा होने 13-14 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि रहेगी, वहीं दुर्गाष्टमी 21 को मनाई जाएगी तथा अगले दिन रामनवमी एवं दशहरा एक ही दिन मनाया जाएगा।महानवमी श्रवण नक्षत्रयुक्त होने से विजयदशमी पर्व भी इसी दिन मनाया जाएगा। श्रवण नक्षत्र में मनाया जाता है और इस बार यह नक्षत्र नवमी के दिन पड़ रहा है। जिसके कारण विजयदशमी 22 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी। नवरात्र में 19 अक्टूबर को सूर्य संक्रांति का पुण्यकाल पड़ रहा है। इस दिन सूर्य अपनी नीच राशि तुला में प्रवेश कर रहा है।

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